




जिला अध्यक्ष राजेन्द्र बौद्ध
का परिचय
राष्ट्रीय वंचित लोक मंच कोटा के जिला अध्यक्ष राजेन्द्र बौद्ध सामाजिक जन सेवक। उनकी निष्कलंक कार्यशैली और निस्वार्थ समर्पण उन्हें एक प्रेरणास्रोत बनाते हैं। सादगी और निष्पक्षता उनके व्यक्तित्व की आधारशिला है। वे अपनी सौम्यता और दृढ़ निश्चय से जटिल परिस्थितियों को सहजता से सुलझा लेते हैं। अपनी संवाद कला के माध्यम से वे मतभेदों को दूर कर, समाज में सौहार्द और समरसता स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जो उन्हें एक कुशल नेतृत्वकर्ता के रूप में प्रतिष्ठित करता है।
बौद्ध समाज परिवार मिलन समारोह – 2025
भिलाई, छत्तीसगढ़ में आयोजित बुद्ध समाज परिवार मिलन समारोह – 2025 भव्य, अनुशासित और प्रेरणादायी वातावरण में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। इस राष्ट्रीय स्तर के आयोजन में बौद्ध भिक्षुगण, सामनेर भंते, राजेन्द्र बौद्ध (कोटा,राजस्थान) सहित देश के विभिन्न राज्यों से पधारे बौद्ध समाज भारत के उपासक-उपासिकाओं की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम को ऐतिहासिक स्वरूप प्रदान किया। आयोजन बौद्ध समाज की वैचारिक दृढ़ता और सांस्कृतिक चेतना का सशक्त प्रतीक बनकर उभरा।
भगवान बुद्ध से संबंधित पवित्र पिपरहवा अवशेषों की वापसी: शांति और करुणा की ऐतिहासिक गूंज
भगवान बुद्ध से संबंधित पवित्र पिपरावा अवशेषों की भव्य अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी के उद्घाटन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “एक सदी से अधिक समय के बाद, भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष भारत लौट आए हैं, जो एक अत्यंत भावुक और ऐतिहासिक क्षण है। ये अवशेष केवल अतीत के खजाने नहीं हैं, बल्कि शांति, करुणा और साझा मानवीय मूल्यों के प्रतीक हैं।
आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के यशस्वी मार्गदर्शन में भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक चेतना सशक्त एवं समृद्ध हुई है। प्रधानमंत्री जी ने अपने पुरुषार्थ एवं कुशल नीतियों से भारत के पुरातन अवशेषों को स्वदेश लाकर हमारी विरासत को पुन: प्रतिष्ठित करने के साथ ही राष्ट्र के गौरव को अभिवर्धित किया है। आज नई दिल्ली में उनके कर-कमलों से भगवान बुद्ध से संबंधित पवित्र पिपरहवा अवशेषों की भव्य अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी, ‘प्रकाश और कमल: जागृत व्यक्ति के अवशेष’ का उद्घाटन उसी पावन संकल्प का विस्तार है।
त्याग, तप, करुणा, शांति और सद्भाव के प्रतीक भगवान बुद्ध के तपस्वी जीवन-दर्शन से साक्षात्कार कराने वाली इस ऐतिहासिक पहल हेतु 140 करोड़ देश वासियों की ओर से आपका हार्दिक आभार प्रधानमंत्री जी।
प्रारंभिक जीवन
राजेन्द्र बौद्ध का जन्म 10 नवंबर 1985 को राजस्थान के कोटा जिले के रामगंजमंडी ग्रामीण में हुआ। उनके पिता का नाम उपासक बाबूलाल जी और माता का नाम उपासिका चमेली बाई ओर उनका परिवार बौद्ध है जो डॉ. भीमराव अम्बेडकर के 14 अक्टूबर 1956 धम्म दीक्षा से प्रेरित है।
सामाजिक शुरुआत
राजेन्द्र बौद्ध की सामाजिक यात्रा की शुरुआत 1998 में हुई, जब मात्र 13 वर्ष की आयु में उन्होंने रामगंजमंडी में अम्बेडकर सेवा समिति की स्थापना की। इसका उद्देश्य अंधविश्वास, पाखंड और रूढ़ियों के खिलाफ जागरूकता फैलाना था।
रामगंजमंडी से कोटा
1 जनवरी 2006 को राजेन्द्र बौद्ध ने अपने जन्मस्थान रामगंजमंडी ग्रामीण को छोड़कर कोटा शहर को अपनी कर्मभूमि बनाया। यह कदम उनके बहुजन आंदोलन ओर सामाजिक संघर्ष को नई दिशा देने वाला साबित हुआ।
वैवाहिक जीवन
राजेन्द्र बौद्ध का विवाह 24 मई 2010 को पूनम द्रविड़ जी से हुआ। पूनम पिता मोहन लाल जी एवं माता गुड्डी बाई हैं यह वैवाहिक संबंध मात्र दो व्यक्तियों का मिलन नहीं, बल्कि समान विचारधारा, मूल्यों और सामाजिक चेतना वाले दो साथियों की जीवन यात्रा का आरंभ था।
बौद्ध धम्म - दीक्षा
21 जुलाई 2021 को राजेन्द्र बौद्ध ने अपने पूरे परिवार के साथ बौद्ध धर्म अपनाया। इस ऐतिहासिक दिन उन्होंने पत्नी ओर बच्चों के साथ धम्म दीक्षा ली। बुद्ध के मार्ग पर चलते हुए समता, मानवता, करुणा और विवेक की राह अपनाने का संकल्प था।













